Friday, March 20, 2009

Chandrayaan Poem

चंद्रयान
क्या दुं तुझे ओ हिन्दुस्तान
दिया जो तूने अभिमान
जीत लिया वो सुंदर चाँद
पेश करके चंद्रयान

सिखाई दुनिया को हरियाली
जीने मे हमारी है सादगी
चाहे हो संगणक या हो तांत्रिकी
सबसे आगे हम हिन्दुस्तानी

मारी हमने शान्त्रंज मे बारी
और लगाई निपूण निशानी
है हमारी महिलायें सुंदरी
सबसे आगे हम हिन्दुस्तानी

रचा हमने ऑस्कर मे इतिहास
नही हुआ ये आकस्मात
झोपड़ी हमारी कुछ कम नही
रहते है यहा सोना चांदी

हासिल किया है आसमान
पेश करके चंद्रयान
दिया जो तुमने अभिमान
क्या दूँ तुझे ओ हिन्दुस्तान

1 comment:

  1. Mathya!!! wowow! You have some amazing talents that we were not aware of! Chhupa Rustom!
    Mahendra Paralkar

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